एक और सुबह देखने मिली
एक और सुबह का सूरज भी
उपरवाले तेरा शुक्रिया
तुने सूरज सी चीज़ बनाई तो सही
वरना सोच सोच के मर जाता
ये तेरा बनाया कवि
'किसमे देखू अपने प्यार का चेहरा'
जो न होता ये प्यारा रवि
भले खूबसूरती में दो कदम पीछे
पर उसके मुख की तरह जगमगाता तो है
मेरे यार की आंखों में है जो नूर
उसका एहसास मुझको दिलाता तो है
उसकी ही तरह सूरज भी
रहता है अपने आप में चंचल
और दूर से सुनाई देती है खामोशी
जो दबा देती है उसके भीतर की हलचल
न जाने क्या सूझी तुझे ऊपरवाले
की बनाया तुने वो दागो भरा चाँद
जो हर रात निकल आता है और
तोड़ता है मेरे भावनाओ का बाँध
जानी है मैंने तेरे जग की ये नीति
कि कैसे की जाए झूटे आशिक की पहचान
अमावस्या की रातों में कहेगा मेह्बूब से
तुम हो चाँद सी सुंदर है मेरा अनुमान
पर खुशी की बात ये है तेरे जग में
की हर रात के बाद आता है एक सवेरा
जब लाखो का मुख बना चाँद जाता
और पूरब से उगता है मेरे प्यार का चेहरा
मेरे यार का चेहरा
दिलदार का चेहरा..........
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