i dreamt of standing at the beach
the ocean washing at my feet
but i don't face the setting sun
i just watch the leaving pretty one
the evening wind is coaxing her back
the sand all pleads but she treads her track
we were holding hands when she asked for an oath
a ring, church bells, on altar us both
i just told her what the promise say
in sick and health together we stay
but also i said that after we say 'i do'
me stays me and you stay you
she thinks i joke and she lost her dove
but in changing other there is no love
now to get her back shall i build what bridge
i dreamt of standing at the beach
Sunday, December 26, 2010
Wednesday, November 24, 2010
निसार किसी पे (Nisaar kisi pe)
कोमल कमल पे ठहरी हुई पानी की बूँद जैसी
तेरे गालो पे गीली लट्तें है दिल को सुकून जैसी
तेरी ज़ुल्फों के पर्दे तेरा चेहरा यु छुपाए
अल्हड घटा रूठी जैसे बिन बरसे ही लौट जाए
शाम का ये रंग है क्या जो आसमा पे बिखरा है
या तू ने चूमा बादल कोई जो गुलाब सा निखरा है
खुशबु तेरे रुखस की कस्तूरी से भी ज्य़ादा
दातो तले दबे लब मानो चाँद हुआ आधा
तेरी सौंधी इतनी आहट के उसे दिल से सुन्नी पड़ती है
कान के पीछे रखी लट मुझे गुदगुदाया करती है
आँख चुरा कर वो प्यारी हंसी तेरी दबी दबी
रूह तक को खुश कर दे जो दिखे वो कभी कभी
हर अरकान अदा है खुदा को जो तू कबूल कर दे
जन्नत उसके नाम जो खुदको तेरी हस्रत में मशगूल कर दे
तेरा एहसास ही तो सच है ये जहां तो एक किस्सा है
तू बस मेरी चाहत नहीं मेरे वजूद का हिस्सा है
तेरी तारीफ़ करना मेहेज़ शौक़ नहीं बंदगी है
ये तेरे कसीदे मेरी अज़ान है तेरा प्यार ज़िन्दगी है
तेरे गालो पे गीली लट्तें है दिल को सुकून जैसी
तेरी ज़ुल्फों के पर्दे तेरा चेहरा यु छुपाए
अल्हड घटा रूठी जैसे बिन बरसे ही लौट जाए
शाम का ये रंग है क्या जो आसमा पे बिखरा है
या तू ने चूमा बादल कोई जो गुलाब सा निखरा है
खुशबु तेरे रुखस की कस्तूरी से भी ज्य़ादा
दातो तले दबे लब मानो चाँद हुआ आधा
तेरी सौंधी इतनी आहट के उसे दिल से सुन्नी पड़ती है
कान के पीछे रखी लट मुझे गुदगुदाया करती है
आँख चुरा कर वो प्यारी हंसी तेरी दबी दबी
रूह तक को खुश कर दे जो दिखे वो कभी कभी
हर अरकान अदा है खुदा को जो तू कबूल कर दे
जन्नत उसके नाम जो खुदको तेरी हस्रत में मशगूल कर दे
तेरा एहसास ही तो सच है ये जहां तो एक किस्सा है
तू बस मेरी चाहत नहीं मेरे वजूद का हिस्सा है
तेरी तारीफ़ करना मेहेज़ शौक़ नहीं बंदगी है
ये तेरे कसीदे मेरी अज़ान है तेरा प्यार ज़िन्दगी है
Wednesday, January 6, 2010
Dil-e-naaraaz
तेरी नाराज़गी बड़ी लम्बी चली
हम थक गए तेरी उल्फत में
शायद अनदेखी की बड़ी ज्यात्तिया
तेरी हमने तेरी चाहत में
हमारी खता अगर है तो भी अदना
पर शौक़ न हमें माफ़ी का है
कि वास्ता नहीं लगता अब बेरुखी से
खफा होना है तेरी आदत में
कि ये क्या की हर वक़्त सुहावना हो
हमें शाम ढले भी जीना होता है
तेरे लिए तब मुस्कुरा नहीं सकते
जब मन हमारा हो दहशत में
पर कहा सुकून पाए तेरे असूस में
तू खुश ख़ुशी को ही ढूंढती है
तो छोड़ दिया तेरे पास प्यासा आना
तू चाहती ही नहीं हमें शिद्दत में
कि फज़ूल का दर्द आँखों में
और घूमे लब पे लिए सवाल कितने
क्या तलाशते रहना तेरी मौजूदगी
क्यू खो जाना है तेरी फितरत में
मैं फिर भी तो बाज़ आया नहीं
कि तेरे परदे ही तो तेरे खुलासे है
एक और नज़म क्यू पेश की मैंने
ऐ जाने वाले तेरी खिदमत में
हम थक गए तेरी उल्फत में
शायद अनदेखी की बड़ी ज्यात्तिया
तेरी हमने तेरी चाहत में
हमारी खता अगर है तो भी अदना
पर शौक़ न हमें माफ़ी का है
कि वास्ता नहीं लगता अब बेरुखी से
खफा होना है तेरी आदत में
कि ये क्या की हर वक़्त सुहावना हो
हमें शाम ढले भी जीना होता है
तेरे लिए तब मुस्कुरा नहीं सकते
जब मन हमारा हो दहशत में
पर कहा सुकून पाए तेरे असूस में
तू खुश ख़ुशी को ही ढूंढती है
तो छोड़ दिया तेरे पास प्यासा आना
तू चाहती ही नहीं हमें शिद्दत में
कि फज़ूल का दर्द आँखों में
और घूमे लब पे लिए सवाल कितने
क्या तलाशते रहना तेरी मौजूदगी
क्यू खो जाना है तेरी फितरत में
मैं फिर भी तो बाज़ आया नहीं
कि तेरे परदे ही तो तेरे खुलासे है
एक और नज़म क्यू पेश की मैंने
ऐ जाने वाले तेरी खिदमत में
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