तू चाहे तो हमें चाह के देख, के आज़मा के तो देख लिया
तसल्ली दे या दे दे रुख्सत अब, भर एक अर्सा तो देख लिया
घुटनों पे चढ़ती गांठें है, और सज्दे के शिकन पेह्शानी पे
जज़ा दे या दे दे रज़ा अब, सुनं के हर दुवा तो देख लिया
सिलाई के सिरे रेशा रेशा छट्टे है, कपडा रफू को रोता है
शर्म दे या दे दे चादर अब, कर के रुस्वा तो देख लिया
नाक की सीध में चलते है, गुलाम लगाम के बनते है
मंज़िल दे या दे दे बेफिक्री अब, कर के गुमराह तो देख लिया
फिका पड़ता रंग इन् दीवारों का, मेरी बिदाई का शौक़ करता है
दे लाली या दे दे रंग सफ़ेद, के कालिक पुत्वा तो देख लिया
तसल्ली दे या दे दे रुख्सत अब, भर एक अर्सा तो देख लिया
घुटनों पे चढ़ती गांठें है, और सज्दे के शिकन पेह्शानी पे
जज़ा दे या दे दे रज़ा अब, सुनं के हर दुवा तो देख लिया
सिलाई के सिरे रेशा रेशा छट्टे है, कपडा रफू को रोता है
शर्म दे या दे दे चादर अब, कर के रुस्वा तो देख लिया
नाक की सीध में चलते है, गुलाम लगाम के बनते है
मंज़िल दे या दे दे बेफिक्री अब, कर के गुमराह तो देख लिया
फिका पड़ता रंग इन् दीवारों का, मेरी बिदाई का शौक़ करता है
दे लाली या दे दे रंग सफ़ेद, के कालिक पुत्वा तो देख लिया