रहबर अनाथों को कपड़े दिलाया करते है
फकीरों को खैराती खाना खिलाया करते है
पर हमनें तो ख़ुद को उस ज़ात का पाया
जिसे लोग खैरात में हसाया करते है
दीवानों की दीवानगी का मज़ाक उड़ता है
नादानों की नासमझी का मज़ाक उड़ता है
पर हम में एक शक्स हमें ऐसा मिला
लोग जिसकी समझ का मज़ाक उडाया करते है
पैसो की दुनिया है पैसे नहीं
कमाए बिना खर्चे हम ऐसे नही
मिल गए कुछ एक को जो थोड़े कागज़ के पुर्जे
हमें हमारी औकात बताया करते है
लफ्जों के जाल में लफ्ज़ नहीं मिलते
मन की बातों को शब्द नहीं मिलते
हम से बेहतर बातों वाले जो है मिले हमें
हम खामोशी से खामोशी का साथ निभाया करते है
कोई शकल नहीं कोई आवाज़ नहीं
कोई खुशबु नहीं कोई एहसास नहीं
मिला नहीं जो कोई ख़्वाबों में आनेवाला
हम लफ्जों से अपने ख्वाब सजाया करते है
किसी ने मुझे बातें कम सहने को कहा है
हर पल है खुशी मुझे खुश रहने को कहा है
ऐ खुदा इस दिल का एक ये अरमान पुरा कर
उस शक्स की खुशी के हम अरमान बनाया करते है
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