एक सादे से चेहरे पे मुस्कान उभार के
रौनक बदल गया कोई अरमान उभार के
जैसे सूरज को तकने से है चाँद की ज़ीनत
पेहचानहमारी बन गई उनको निहार के
बस उनके होने से ही खोने का डर गया
और पा लिया सब मैंने सब उनपे निसार के
अब करें क्यूँ आस कोई रहमतों के बारिश की
मिले तनहा गर्मी में जो साथी बहार के
प्यार अगर सिर्फ़ दिल में मेरे हुआ आशिना तो क्या
खो जाते है रिश्तों में बंध रिश्ते हज़ार के
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