Thursday, August 21, 2008

पयाम

कुछ आखरी लफ्जों के बाद, डर डर के हमने अपना नाम लिखा,
साहिल पे आप के नाम हमने एक प्यार का पयाम लिखा।

एक लेहर बहा के ले गई, उसका काम था वो कर गई,
हमारे पैगाम की जगह पे हमें एक साफ़ सलाम दिखा।

जो समुन्दर हमको बांटें है, दो किनारों के बीच रह कर,
एक लंबे सफर में उसे पार कर हमें आप का धाम दिखा।

जब पहुंचे आपके किनारे पे तो हुकमो हमारे जैसा ही,
रेतपे लिखा हुआ हुबहू पयाम दिखा।

क्या समुन्दर ने हमारा पयाम आप तक पहुँचाया था?
कि हमें याद करके आप ने, हाल-ऐ-दिल हमारे नाम लिखा?

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